राधl प्रेम की पवित्र गहराई कृष्ण के विराट को समेटने के लिए जिस राधा ने अपने हृदय को इतना विस्तार दिया कि सारा ब्रज उसका हृदय बन गया। इसलिए कृष्ण भी पूछते हैं- बूझत श्याम कौन तू गौरी ! किन्तु राधा और राधा प्रेम की थाह पाना संभव ही नहीं। कुरूक्षेत्र में उनके आते ही समस्त परिवेश बदल जाता है। रूक्मणि गर्म दूध के साथ राधा को अपनी जलन भी देती है। कृष्ण स्मरण कर राधा उसे एक सांस में पी जाती है। रूक्मणि देखती है कि श्रीकृष्ण के पैरों में छाले हैं, मानों गर्म खोलते तेल से जल गए हों। वे पूछती हैं ये फफोले कैसे ? कृष्ण कहते हैं - हे प्रिये ! मैं राधा के हृदय में हूं। तुम्हारे मन की जिस जलन को राधा ने चुपचाप पी लिया, वही मेरे तन से फूटी है। भगवान श्री कृष्ण ने राधा से विवाह इसलिए नहीं किया क्योंकि उसका आत्मा का बंधन था परमात्मा के साथ एक तरह से उनकी शादी आत्मा और परमात्मा की पहले ही हो चुकी थी फिर शादी करने की क्या जरूरत थी वह श्रीकृष्ण में लीन हो गई श्री कृष्ण राधा मिलन हो गए राधा कृष्ण बन गए सनातन धर्म में रुके हुए जल को वरुण देव का प्रतीक माना गया है। जब गोपियां हर सुबह देव पू...
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